समाजशास्त्र में प्रकार्यवाद के आधारों का वर्णन कीजिये...

Describe the bases of functionalism in sociology...

 
Describe the bases of functionalism in sociology...

प्रकार्यवाद के आधारों का वर्णन करने से पहले हमें प्रकार्यवाद की परिभाषा समझनी चाहिए।

 

 

प्रकार्यवाद एक दावा है कि एक क्रिया या कार्य अपने परिणामों और आचरण से बाध्य होता है, और इसलिए परिणामों के आधार पर कार्य का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। प्रकार्यवाद के आधार निम्नलिखित हो सकते हैं:


1. कर्मफलवाद (Consequentialism):
 

कर्मफलवाद के अनुसार, कार्य का मूल्यांकन उसके परिणामों या नतीजों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसके अनुसार, एक कार्य को श्रेष्ठ माना जाता है जब उसके परिणाम या नतीजे अधिक उपयोगी और सुखदायक होते हैं। कर्मफलवाद में महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं जैसे कि सार्वभौमिक सुख की प्राथमिकता, सामाजिक न्याय और सामाजिक महत्वाकांक्षा।

2. दायित्ववाद (Deontological Ethics):

दायित्ववाद के अनुसार, कार्य का मूल्यांकन उसके कार्यानुशासन और नैतिक मूल्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसके अनुसार, कार्य के लिए सही या गलत का निर्णय करने के लिए नैतिक मूल्यों, सिद्धांतों और आदर्शों का पालन किया जाना चाहिए। यहां कुछ महत्वपूर्ण दायित्ववादी नैतिक सिद्धांत हैं जैसे कि मानवाधिकार, न्याय, सत्य, आपातकालिकता, और संपर्कबद्धता।

3. आदर्शवाद (Virtue Ethics):

आदर्शवाद के अनुसार, कार्य का मूल्यांकन उसके कर्मयोग्यता, आदर्शों और गुणों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसके अनुसार, एक कार्य श्रेष्ठ माना जाता है जब वह व्यक्ति के आदर्श और गुणों को प्रमाणित करता है और उसे एक अच्छे व्यक्ति बनाने में सहायता करता है। आदर्शवादी नैतिक सिद्धांत में सहजता, सहानुभूति, धैर्य, योग्यता, और सत्य को महत्व दिया जाता है।

इन आधारों के आधार पर प्रकार्यवाद विचारधारा कार्य का मूल्यांकन करती है और उनके अनुसार एक कार्य को श्रेष्ठ, न्यायसंगत, योग्य और नैतिक मान्य माना जाता है।