चंदौली में प्राचीन शिव मंदिर की धर्मशाला-कुआं बेचने का आरोप, ग्रामीणों ने डीएम से मांगी जांच

 
चंदौली में प्राचीन शिव मंदिर की धर्मशाला-कुआं बेचने का आरोप, ग्रामीणों ने डीएम से मांगी जांच

चंदौली। शाहबगंज चौक के पास स्थित करीब 200 वर्ष पुराने प्राचीन शिव मंदिर परिसर की धर्मशाला और कुएं को कथित तौर पर निजी संपत्ति बताकर बेचने के आरोप का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कराने और राजस्व अभिलेखों के आधार पर संपत्ति के स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर की देखरेख और पूजा-पाठ के लिए पुजारी कैलाश गिरी को जिम्मेदारी दी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 23 मई 2026 को धर्मशाला और कुएं को कुन्दन सोनी पुत्र बिन्देश्वरी सोनी को कथित तौर पर 10 लाख रुपये में बेचने का लेन-देन किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि धर्मशाला और कुआं लंबे समय से सार्वजनिक उपयोग में हैं और इन्हें निजी संपत्ति के रूप में हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि मंदिर परिसर की धर्मशाला में धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक यहां ढोलक, मंजीरा, टाट-पट्टी और सफाई से जुड़ी सामग्री समेत अन्य सार्वजनिक उपयोग की वस्तुएं रखी जाती हैं।

धर्मशाला से लगे कुएं को लेकर भी ग्रामीणों ने सार्वजनिक उपयोग का दावा किया है। उनका कहना है कि कुएं का इस्तेमाल स्थानीय लोग पानी और मंदिर परिसर की साफ-सफाई के लिए करते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से कुएं और धर्मशाला के स्वामित्व से संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।

सरकारी बजट से मरम्मत कराने का दावा

ग्रामीणों ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2010-11 में तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा शासन से मिले करीब 26 हजार रुपये के बजट से धर्मशाला और कुएं की मरम्मत कराई गई थी। ग्रामीणों ने इस तथ्य का हवाला देते हुए संबंधित विकास कार्यों के अभिलेखों की भी जांच कराने की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कथित लेन-देन की जानकारी वर्तमान ग्राम प्रधान और ग्राम समाज को नहीं दी गई। उन्होंने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने के साथ मंदिर, धर्मशाला और कुएं की वास्तविक स्थिति तथा स्वामित्व की जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि राजस्व अभिलेख, पुराने विकास कार्यों के दस्तावेज और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।