Gorakhpur News: जेल में बंद पिता के नाम पर फर्जी वसीयतनामा बनाकर पैतृक जमीन हड़पने का आरोप, जांच की मांग

 
Meta Title  Mirzapur News: विंध्य पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए 36 गांवों में मुआवजे पर सहमति  Meta Description  मीरजापुर में विंध्य पूर्वांचल स्पर एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर क्रय कमेटी की बैठक हुई। 36 प्रभावित गांवों के काश्तकारों को सर्किल दर का चार गुना मुआवजा देने पर सहमति बनी।  SEO Keywords  Mirzapur News, Vindhya Purvanchal Spur Expressway, Vindhya Purvanchal Expressway, Mirzapur Expressway, Chunar News, Mirzapur Land Acquisition, Land Compensation Mirzapur, Four Times Circle Rate, Farmers Compensation, Chunar Tehsil, Mirzapur DM, Pawan Kumar Gangwar, 36 Villages Mirzapur, Expressway Construction, Land Acquisition Uttar Pradesh, Uttar Pradesh Expressway, Live Bharat News

गोरखपुर। पैतृक जमीन के नामांतरण में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। श्याम नारायण तिवारी ने आरोप लगाया है कि उनके पिता उमेश तिवारी के नाम दर्ज करीब चार एकड़ 11 डिसमिल जमीन को फर्जी नोटिस, वसीयतनामा, हिब्बानामा और कथित गवाहों के जरिए दूसरे लोगों के नाम दर्ज करा लिया गया।

उन्होंने बुधवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

श्याम नारायण तिवारी के अनुसार, ग्राम बसवार स्थित परिवार की पैतृक जमीन वर्ष 1990 से उनके पिता उमेश तिवारी के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी। उनका आरोप है कि जमीन के नामांतरण के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और अभिलेखों में तथ्यों के साथ हेरफेर कर संपत्ति दूसरे लोगों के नाम दर्ज करा दी गई।

पिता के जेल में रहने के दौरान नामांतरण पर उठाए सवाल

श्याम नारायण तिवारी ने बताया कि उनके पिता वर्ष 1997 से 2003 तक जेल में बंद थे। उनका आरोप है कि इसी अवधि में जमीन से संबंधित दस्तावेज तैयार कर नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके पिता जेल में थे, तब उन्हें जमीन से संबंधित नोटिस कैसे जारी किया गया और उसकी तामील किस तरह दर्शाई गई।

उन्होंने मांग की कि नोटिस जारी करने और उसकी तामील से संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नामांतरण की प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी या नहीं।

वसीयतनामा और हिब्बानामा की जांच की मांग

प्रेसवार्ता के दौरान श्याम नारायण तिवारी ने कथित फर्जी वसीयतनामा और हिब्बानामा का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि 25 जुलाई 1997 की तारीख वाले हिब्बानामा में उनके दादा रमाकान्त तिवारी का अंगूठा निशान दर्शाया गया है, जबकि संबंधित जमीन उनके पिता उमेश तिवारी के नाम दर्ज थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दस्तावेजों में गांव के पांच लोगों को गवाह के रूप में दर्शाया गया, जबकि उनके अनुसार इन लोगों ने न तो संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और न ही गवाही दी। श्याम नारायण ने संबंधित हस्ताक्षरों और अंगूठे के निशानों की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है।

एक साल से अधिकारियों के चक्कर लगाने का दावा

श्याम नारायण तिवारी ने आरोप लगाया कि वह करीब एक वर्ष से मुख्यमंत्री, पुलिस के उच्चाधिकारियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। उन्होंने मामले से जुड़े कुछ लोगों और घुघली के तत्कालीन तहसीलदार की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की।

उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण में राजस्व अभिलेखों, कथित वसीयतनामा, हिब्बानामा, नोटिस की तामील और नामांतरण आदेश की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनका कहना है कि दस्तावेजों की जांच से ही कथित फर्जीवाड़े की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

श्याम नारायण तिवारी ने शासन-प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दस्तावेजों में कथित हेरफेर करने वालों की पहचान करने और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य तथ्यों को सामने लाना और परिवार की पैतृक संपत्ति के मामले में न्याय प्राप्त करना है।

नोट: मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का जवाब और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आने पर ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट होगी।